श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.59.60 
मृगयाक्षास्तथा पानं स्त्रियश्च भरतर्षभ।
कामजान्याहुराचार्य: प्रोक्तानीह स्वयम्भुवा॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! नीतिशास्त्र के विशेषज्ञों ने जिन चार प्रकार के काम-संबंधी व्यसनों का उल्लेख किया है - मृगया, जुआ, मद्यपान और मैथुन - उन सबको भगवान ब्रह्मा ने इस ग्रन्थ में प्रतिपादित किया है ॥60॥
 
Bharatshrestha! Lord Brahma has propounded all of them in this book as the four types of lust-related addictions that the experts of ethics have mentioned - Mrigaya, gambling, drinking and sexual intercourse. 60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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