श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.59.5 
युधिष्ठिर उवाच
य एष राजन् राजेति शब्दश्चरति भारत।
कथमेष समुत्पन्नस्तन्मे ब्रूहि परंतप॥ ५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भरतवंशी राजा! संसार में प्रयुक्त होने वाला 'राजा' शब्द किस प्रकार उत्पन्न हुआ? कृपा करके मुझे यह बताइए।" ॥5॥
 
Yudhishthira said, "O King of the Bharata dynasty, who torments his enemies! How did the word 'Raja', which is being used in the world, originate? Kindly tell me this." ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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