श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.59.44 
कृत्स्ना मार्गगुणाश्चैव तथा भूमिगुणाश्च ह।
आत्मरक्षणमाश्वास: सर्गाणां चान्ववेक्षणम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तथा मार्ग के सभी गुण, भूमि के गुण, आत्मरक्षा के साधन, आश्वासन तथा रथों का निर्माण और निरीक्षण आदि का भी वर्णन किया गया है ॥ 44॥
 
And all the qualities of the path, qualities of the land, means of self-defense, assurance and construction and inspection of chariots etc. are also described. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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