श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.59.43 
स्पर्शे चाभ्यवहार्ये चाप्युपांशुर्विविध: स्मृत:।
अरिर्मित्र उदासीन इत्येतेऽप्यनुवर्णिता:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इस गुप्त दण्ड (विष आदि) का प्रयोग शत्रु के वस्त्रों को स्पर्श करने अथवा उनके भोजन में मिलाने के लिए किया जाता है। उपर्युक्त नीतिशास्त्र में विविध मंत्रों के जाप का प्रयोग भी बताया गया है। इसके अतिरिक्त इस ग्रन्थ में शत्रु, मित्र और उदासीन का भी बार-बार वर्णन किया गया है। ॥43॥
 
This secret means of punishment (poison etc.) is used to touch the clothes of the enemy or to mix it in their food. The use of chanting various mantras is also mentioned in the above mentioned ethics. Apart from this, the enemy, friend and indifferent have also been described repeatedly in this book. ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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