श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  12.59.41-42h 
रथा नागा हयाश्चैव पादाताश्चैव पाण्डव।
विष्टिर्नावश्चराश्चैव देशिका इति चाष्टमम्॥ ४१॥
अङ्गान्येतानि कौरव्य प्रकाशानि बलस्य तु।
 
 
अनुवाद
हे कुरुवंशी पाण्डुपुत्र! हाथी, घोड़े, रथ, पैदल सेना, बेगार में पकड़े गए बोझ ढोने वाले लोग, नाविक, गुप्तचर और कर्तव्य का उपदेश देने वाले गुरु - ये सेना के आठ दृश्य अंग हैं। ॥41 1/2॥
 
O son of Pandu of the Kuru dynasty! Elephants, horses, chariots, infantry, people carrying loads captured as forced labour, boatmen, spies and gurus who preach the duty - these are the eight visible parts of the army. ॥ 41 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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