श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.59.33 
त्रयी चान्वीक्षिकी चैव वार्ता च भरतर्षभ।
दण्डनीतिश्च विपुला विद्यास्तत्र निदर्शिता:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! उस ग्रन्थ में वेदत्रयी (कर्मकाण्ड), आन्वीक्षिकी (ज्ञान), वार्ता (कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य) तथा दण्डनीति- इन विशाल विद्याओं का वर्णन किया गया है ॥33॥
 
Bharatshrestha! In that book, Vedatrayee (rituals), Anvikshiki (knowledge), Varta (agriculture, cow protection and commerce) and Dandaneeti – these vast sciences have been described. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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