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श्लोक 12.59.145  |
एतत् ते सर्वमाख्यातं महत्त्वं प्रति राजसु।
कात्स्न्र्येन भरतश्रेष्ठ किमन्यदिह वर्तते॥ १४५॥ |
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| अनुवाद |
| हे भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार मैंने तुम्हें राजाओं का महत्त्व विस्तारपूर्वक बताया है। अब इस विषय में तुम्हें और क्या जानना शेष है?॥145॥ |
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| O best of the Bharatas! In this way I have told you in full detail the importance of kings. Now what more is left for you to know in this matter?॥ 145॥ |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि सूत्राध्याये एकोनषष्टितमोऽध्याय:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें सूत्राध्यायविषयक उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५९॥
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