श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  12.59.144 
ततो जगति राजेन्द्र सततं शब्दितं बुधै:।
देवाश्च नरदेवाश्च तुल्या इति विशाम्पते॥ १४४॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! प्रजानाथ! तब से संसार में विद्वान लोग सदा से यही कहते आए हैं कि 'देव और नरदेव (राजा) समान हैं' ॥144॥
 
Rajendra! Prajanath! Since then scholars in the world have declared forever that 'Dev and Nardev (King) are equal'. 144॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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