| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन » श्लोक 143 |
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| | | | श्लोक 12.59.143  | भुवि चाधोगतं यच्च तच्च सर्वं समर्पितम्।
तस्मिन् पैतामहे शास्त्रे पाण्डवैतन्न संशय:॥ १४३॥ | | | | | | अनुवाद | | हे पाण्डुपुत्र! इससे अधिक क्या कहा जा सकता है? इस पृथ्वी पर और इसके नीचे जो कुछ भी है, वह सब ब्रह्माजी के पूर्वोक्त शास्त्र में समाविष्ट है, इसमें संशय नहीं है ॥143॥ | | | | O son of Pandu! What more can be said? Whatever is on this earth and beneath it, all of that has been included in the aforesaid Shastra of Brahmaji, there is no doubt about it. ॥ 143॥ | | ✨ ai-generated | | |
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