श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 141-142
 
 
श्लोक  12.59.141-142 
इतिहासाश्च वेदाश्च न्याय: कृत्स्नश्च वर्णित:।
तपो ज्ञानमहिंसा च सत्यासत्येन य: पर:॥ १४१॥
वृद्धोपसेवा दानं च शौचमुत्थानमेव च।
सर्वभूतानुकम्पा च सर्वमत्रोपवर्णितम्॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
इतिहास, वेद, न्याय - ये सब उसमें पूर्णरूपेण वर्णित हैं। तप, ज्ञान, अहिंसा तथा जो सत्य-असत्य से परे है, तथा वृद्धों की सेवा, दान, शौच, उत्थान और सभी प्राणियों पर दया आदि सभी विषयों का उस ग्रन्थ में वर्णन है। 141-142॥
 
History, Vedas, justice – all these are described in full in it. All the subjects like penance, knowledge, non-violence and that which is beyond truth and untruth and service to the elderly, charity, defecation, upliftment and kindness towards all living beings etc. are described in that book. 141-142॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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