श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 139-140
 
 
श्लोक  12.59.139-140 
आगमश्च पुराणानां महर्षीणां च सम्भव:।
तीर्थवंशश्च वंशश्च नक्षत्राणां युधिष्ठिर॥ १३९॥
सकलं चातुराश्रम्यं चातुर्होत्रं तथैव च।
चातुर्वर्ण्यं तथैवात्र चातुर्विद्यं च कीर्तितम्॥ १४०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! उपर्युक्त नीतिशास्त्र में पुराण, महर्षियों की उत्पत्ति, तीर्थों के समूह, नक्षत्र, ब्रह्मचर्य आदि चार आश्रम, होता आदि चार प्रकार के ऋत्विजों से सम्पन्न यज्ञ, चार वर्ण और चार विद्याएँ प्रतिपादित की गई हैं ॥139-140॥
 
Yudhisthira! The Puranas, the origin of the Maharishis, groups of pilgrims, constellations, celibacy etc., four ashrams, yajnas performed with the four types of Ritvijas like Hota etc., the four Varnas and the four Vidyas have been propounded in the above mentioned Niti Shastra. 139-140॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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