श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  12.59.136 
शुभं हि कर्म राजेन्द्र शुभत्वायोपकल्पते।
तुल्यस्यैकस्य यस्यायं लोको वचसि तिष्ठते॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! शुभ कर्मों का फल शुभ होता है, इसीलिए अन्य मनुष्यों के समान होते हुए भी यह सम्पूर्ण जगत् एकमात्र राजा की आज्ञा में रहता है ॥136॥
 
Rajendra! The result of good deeds is auspicious, that is why despite being equal to other human beings, this whole world remains under the command of the only king. 136॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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