श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  12.59.135 
स्थापितं च ततो देवैर्न कश्चिदतिवर्तते।
तिष्ठत्येकस्य च वशे तं चेदं न विधीयते॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं द्वारा उसे राजा मानकर कोई भी उसकी आज्ञा का उल्लंघन नहीं करता। यह सम्पूर्ण जगत् उसी एक पुरुष के अधीन रहता है; यह जगत् उस पर शासन नहीं कर सकता॥135॥
 
Thereafter, considering him to be installed as a king by the gods, no one disobeys his command. This entire world remains under the control of that one person; this world cannot rule over him.॥ 135॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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