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श्लोक 12.59.128  |
तपसा भगवान् विष्णुराविवेश च भूमिपम्।
देववन्नरदेवानां नमते यं जगन्नृपम्॥ १२८॥ |
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| अनुवाद |
| राजा पृथुकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं उनमें प्रविष्ट हुए । समस्त राजाओं में राजा पृथु के समक्ष ही समस्त जगत ने देवता के समान अपना मस्तक झुकाया । 128॥ |
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| Pleased with King Prithuki's penance, Lord Vishnu himself entered him. Among all the kings, it was to King Prithu that the whole world bowed its head like a god. 128॥ |
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