श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  12.59.108 
अदण्डॺा मे द्विजाश्चेति प्रतिजानीहि हे विभो।
लोकं च संकरात्कृत्स्नं त्रातास्मीति परंतप॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
परंतप प्रभु! यह भी प्रतिज्ञा करो कि 'ब्राह्मण मेरे लिए दंडनीय नहीं होंगे और मैं सम्पूर्ण जगत को जाति-धर्म के मिश्रण से बचाऊँगा।'॥108॥
 
'Parantapa Prabhu! Also take this vow that 'Brahmins will be unpunishable for me and I will save the whole world from mixing of castes and religions.'॥ 108॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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