श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  12.59.106 
प्रतिज्ञां चाधिरोहस्व मनसा कर्मणा गिरा।
पालयिष्याम्यहं भौमं ब्रह्म इत्येव चासकृत्॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
यह भी प्रतिज्ञा करो कि ‘मैं मन, वाणी और कर्म से पृथ्वी पर स्थित ब्रह्म (वेद) का निरन्तर पालन करूँगा।’ ॥106॥
 
Also take this vow: 'I will constantly follow the Brahma (Veda) existing on earth through my mind, speech and actions.' ॥106॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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