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श्लोक 12.59.102  |
यन्मां भवन्तो वक्ष्यन्ति कार्यमर्थसमन्वितम्।
तदहं वै करिष्यामि नात्र कार्या विचारणा॥ १०२॥ |
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| अनुवाद |
| आप लोग मुझे जो भी उद्देश्यपूर्ण कार्य करने का आदेश देंगे, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।॥102॥ |
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| 'Whatever purposeful work you all order me to do, I will certainly complete it. There should be no second thoughts about it.'॥ 102॥ |
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