| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 12.59.10  | एकस्य तु प्रसादेन कृत्स्नो लोक: प्रसीदति।
व्याकुले चाकुल: सर्वो भवतीति विनिश्चय:॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | यह तो अवश्य देखा जा सकता है कि जब एक राजा प्रसन्न होता है, तो सारा संसार प्रसन्न हो जाता है और जब वह एक राजा दुःखी होता है, तो बाकी सब भी दुःखी हो जाते हैं ॥10॥ | | | | It can certainly be seen that when a single king is happy, the entire world becomes happy and when that one king is upset, everybody else also becomes upset. ॥10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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