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श्लोक 12.58.14  |
उत्थानेनामृतं लब्धमुत्थानेनासुरा हता:।
उत्थानेन महेन्द्रेण श्रैष्ठॺं प्राप्तं दिवीह च॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| देवराज इन्द्र ने उद्योग के द्वारा ही अमृत प्राप्त किया, उद्योग के द्वारा ही दैत्यों का संहार किया तथा उद्योग के द्वारा ही देवलोक तथा इस लोक में श्रेष्ठता प्राप्त की ॥14॥ |
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| 'Devraj Indra obtained nectar through industry, killed the demons through industry and attained superiority in the world of gods and this world only through industry. 14॥ |
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