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mahabharat 12.57.41: मनुष्य को चाहिए कि पहले राजा प्राप्त करे। तत्पश्चात् स्त्री प्राप्त करे और धन संचय करे। यदि प्रजा की रक्षा करने वाला राजा न हो, तो स्त्री कैसे सुरक्षित रहेगी और धन की रक्षा कैसे होगी?॥41॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.57.41 
राजानं प्रथमं विन्देत् ततो भार्यां ततो धनम्।
राजन्यसति लोकस्य कुतो भार्या कुतो धनम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि पहले राजा प्राप्त करे। तत्पश्चात् स्त्री प्राप्त करे और धन संचय करे। यदि प्रजा की रक्षा करने वाला राजा न हो, तो स्त्री कैसे सुरक्षित रहेगी और धन की रक्षा कैसे होगी?॥41॥
 
‘A man should first acquire a king. After that he should acquire a wife and accumulate wealth. If there is no king who protects the people, how will the wife remain safe and how will the wealth be protected?’॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)