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mahabharat 12.57.16: राजा को किसी पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए। उसे किसी विश्वसनीय व्यक्ति पर भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए। राजनीति के छह गुण हैं- संधि, पृथक्करण, वाहन, आसन, द्वैत और आश्रय*। उसे अपनी बुद्धि से इन सबके गुण-दोषों की सदैव जाँच करनी चाहिए।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 57: राजाके धर्मानुकूल नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.57.16 
न विश्वसेच्च नृपतिर्न चात्यर्थं च विश्वसेत्।
षाड्गुण्यगुणदोषांश्च नित्यं बुद्धॺावलोकयेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजा को किसी पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए। उसे किसी विश्वसनीय व्यक्ति पर भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए। राजनीति के छह गुण हैं- संधि, पृथक्करण, वाहन, आसन, द्वैत और आश्रय*। उसे अपनी बुद्धि से इन सबके गुण-दोषों की सदैव जाँच करनी चाहिए।॥16॥
 
The king should not trust anyone. He should not trust even a trustworthy person completely. There are six qualities of politics- treaty, separation, vehicle, seat, duality and shelter*. He should always examine the qualities and defects of all these with his intelligence.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)