श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.56.7 
उदयन् हि यथा सूर्यो नाशयत्यशुभं तम:।
राजधर्मास्तथालोक्यां निक्षिपन्त्यशुभां गतिम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे सूर्य भगवान् उदय होते ही अंधकार का नाश कर देते हैं, वैसे ही राजधर्म मनुष्यों के उस दुराचरण को दूर कर देता है, जो उन्हें पुण्य लोकों से वंचित कर देता है ॥7॥
 
Just as the Sun God destroys the darkness as soon as he rises, similarly the Rajdharma removes the evil conduct of men, which deprives them of the virtuous worlds. ॥ 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd