श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.56.58 
अलंकारे च भोज्ये च तथा स्नानानुलेपने।
हेलनानि नरव्याघ्र स्वस्थास्तस्योपशृण्वत:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
हे सिंह पुरुष! राजा पास खड़ा होकर सुनता है। वह निर्भय होकर उसके आभूषण पहनने, खाने, स्नान करने और चंदन लगाने का उपहास करता है ॥ 58॥
 
O lion man! The king stands nearby and listens. Fearlessly, he makes fun of her for wearing jewelry, eating, bathing, and applying sandalwood paste. ॥ 58॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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