यथा हि गर्भिणी हित्वा स्वं प्रियं मनसोऽनुगम्।
गर्भस्य हितमाधत्ते तथा राज्ञाप्यसंशयम्॥ ४५॥
वर्तितव्यं कुरुश्रेष्ठ सदा धर्मानुवर्तिना।
स्वं प्रियं तु परित्यज्य यद् यल्लोकहितं भवेत्॥ ४६॥
अनुवाद
जिस प्रकार गर्भवती स्त्री अपना प्रिय भोजन त्यागकर अपने गर्भस्थ शिशु के हित का ध्यान रखती है, उसी प्रकार धर्मात्मा राजा को भी वैसा ही आचरण करना चाहिए। हे कुरुश्रेष्ठ! राजा को चाहिए कि वह अपनी प्रिय वस्तुओं का त्याग करके सबका हित करने वाला कार्य करे। ॥45-46॥
Just as a pregnant woman gives up her favourite food and takes care of the welfare of her unborn child, a virtuous king should also behave in the same way. O best of the Kurus! The king should give up the things that are dear to him and do the work that is beneficial to everyone. ॥ 45-46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥