श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.56.44 
भवितव्यं सदा राज्ञा गर्भिणीसहधर्मिणा।
कारणं च महाराज शृणु येनेदमिष्यते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! राजा को अपनी प्रजा के साथ गर्भवती स्त्री के समान व्यवहार करना चाहिए। मैं आपको बताता हूँ कि यह क्यों उचित है। सुनिए॥44॥
 
Maharaj! The king should behave with his subjects like a pregnant woman. I will tell you why this is appropriate. Listen. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)