तस्मान्नैव मृदुर्नित्यं तीक्ष्णो नैव भवेन्नृप:।
वासन्तार्क इव श्रीमान् न शीतो न च घर्मद:॥ ४०॥
अनुवाद
जैसे वसन्त ऋतु का तेज सूर्य न तो अधिक शीतलता लाता है और न अधिक गर्मी, वैसे ही राजा को भी न तो अधिक कोमल होना चाहिए और न अधिक कठोर ॥40॥
Just as the bright Sun of the spring season neither brings too much coolness nor too much heat, similarly a king should neither be too gentle nor too harsh. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥