दुर्गेषु च महाराज षट्सु ये शास्त्रनिश्चिता:।
सर्वदुर्गेषु मन्यन्ते नरदुर्गं सुदुस्तरम्॥ ३५॥
अनुवाद
महाराज! मरुस्थल (जलरहित भूमि), जल, थल, वन, पर्वत और मानव - इन छह प्रकार के दुर्गों में मानव दुर्ग सबसे श्रेष्ठ है। शास्त्रों के तत्त्व को जानने वाले विद्वान उपर्युक्त सभी दुर्गों में मानव दुर्ग को सबसे अधिक दुर्भेद्य मानते हैं ॥ 35॥
Maharaj! Of the six types of forts - desert (waterless land), water, earth, forest, mountain and human - the human fort is the most important. Scholars who know the principles of the scriptures consider the human fort to be the most impregnable of all the above mentioned forts. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥