एवं चैव नरश्रेष्ठ रक्ष्या एव द्विजातय:।
सापराधानपि हि तान् विषयान्ते समुत्सृजेत्॥ ३१॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! इतना सब होने पर भी ब्राह्मणों की सदैव रक्षा करनी चाहिए; यदि वे कोई अपराध करें तो उन्हें मृत्युदंड देने के स्थान पर अपने राज्य की सीमा से बाहर निकाल देना चाहिए ॥31॥
O best of men! In spite of all this, brahmins must always be protected; if they commit a crime, then instead of giving them death penalty they should be expelled from the boundaries of your kingdom. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥