श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.56.29 
उद्यम्य शस्त्रमायान्तमपि वेदान्तगं रणे।
निगृह्णीयात् स्वधर्मेण धर्मापेक्षी नराधिप:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘यदि कोई विद्वान् ब्राह्मण, वेदान्त में पारंगत होकर शस्त्र लेकर युद्ध करने आए, तो धर्म की रक्षा करने की इच्छा रखने वाले राजा को चाहिए कि वह अपने धर्मानुसार युद्ध करके उसे पकड़ ले॥ 29॥
 
‘If a learned Brahmin, well versed in Vedanta, takes up arms and comes to fight in battle, a king who wishes to uphold Dharma should fight according to his Dharma and capture him.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)