Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.56.27: पुरुषसिंह! यद्यपि ऐसी बात है, फिर भी यदि ब्राह्मण भी तीनों लोकों का नाश करने पर उतारू हो जाएँ, तो ऐसे लोगों को अपनी भुजाओं के बल से परास्त करके सदैव वश में रखना चाहिए॥27॥ | mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं चैव नरव्याघ्र लोकत्रयविघातका:।
निग्राह्या एव सततं बाहुभ्यां ये स्युरीदृशा:॥ २७॥
अनुवाद
पुरुषसिंह! यद्यपि ऐसी बात है, फिर भी यदि ब्राह्मण भी तीनों लोकों का नाश करने पर उतारू हो जाएँ, तो ऐसे लोगों को अपनी भुजाओं के बल से परास्त करके सदैव वश में रखना चाहिए॥27॥
Purusha Singh! Although this is the case, yet if Brahmins also become ready to destroy the three worlds, then such people should be defeated with the strength of their arms and always kept under control. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥