श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.56.23 
मनुना चैव राजेन्द्र गीतौ श्लोकौ महात्मना।
धर्मेषु स्वेषु कौरव्य हृदि तौ कर्तुमर्हसि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! कुरुनन्दन! महात्मा मनु ने अपने धर्मग्रन्थों में दो श्लोक गाये हैं, तुम उन दोनों को अपने हृदय में धारण करो॥23॥
 
Rajendra! Kurunandan! Mahatma Manu has sung two verses in his religious scriptures, you should keep both of them in your heart. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)