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mahabharat 12.56.10: भीष्मजी बोले - उत्तम धर्म को नमस्कार है। जगत के रचयिता भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार है। अब मैं ब्राह्मणों को नमस्कार करके सनातन धर्मों का वर्णन आरम्भ करूँगा। 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.56.10 
भीष्म उवाच
नमो धर्माय महते नम: कृष्णाय वेधसे।
ब्राह्मणेभ्यो नमस्कृत्य धर्मान् वक्ष्यामि शाश्वतान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - उत्तम धर्म को नमस्कार है। जगत के रचयिता भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार है। अब मैं ब्राह्मणों को नमस्कार करके सनातन धर्मों का वर्णन आरम्भ करूँगा। 10॥
 
Bhishmaji said – Salutations to the great religion. Salutations to Lord Krishna, the creator of the universe. Now I will start describing the Sanatan religions by saluting the Brahmins. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)