श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 56: युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मके द्वारा राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये पुरुषार्थ और सत्यकी आवश्यकता, ब्राह्मणोंकी अदण्डनीयता तथा राजाकी परिहासशीलता और मृदुतासे प्रकट होनेवाले दोष  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.56.1 
वैशम्पायन उवाच
प्रणिपत्य हृषीकेशमभिवाद्य पितामहम्।
अनुमान्य गुरून् सर्वान् पर्यपृच्छद् युधिष्ठिर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन्! तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण और भीष्म को प्रणाम करके युधिष्ठिर ने सब गुरुजनों की अनुमति लेकर यह प्रश्न पूछा॥1॥
 
Vaishampayanji says – King! After that, after paying obeisance to Lord Krishna and Bhishma, Yudhishthira took the permission of all the teachers and asked this question. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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