समयत्यागिनो लुब्धान् गुरूनपि च केशव।
निहन्ति समरे पापान् क्षत्रियो य: स धर्मवित्॥ १६॥
अनुवाद
केशव! जो क्षत्रिय लोभ के कारण धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करने वाले पापी गुरुजनों को भी मारकर समरांगण में डाल देता है, वह निश्चय ही धर्म का ज्ञाता है ॥16॥
Keshav! The Kshatriya who, out of greed, kills even the sinful teachers who violate the limits of religion and puts them in Samarangana, is certainly a knower of Dharma. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥