श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.54.4 
वैशम्पायन उवाच
शरतल्पगते भीष्मे कौरवाणां धुरन्धरे।
आजग्मुर्ऋषय: सिद्धा नारदप्रमुखा नृप॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, 'हे प्रभु! जब कौरव वंश का भार उठाने वाले भीष्म बाणों की शय्या पर सो रहे थे, तब नारद आदि महान ऋषि भी वहाँ आये थे।
 
Vaishmpayana said, 'O Lord! When Bhishma, who was carrying the burden of the Kaurava clan, was sleeping on the bed of arrows, great sages like Narada had also come there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)