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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत
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श्लोक 32
श्लोक
12.54.32
यावद्धि प्रथते लोके पुरुषस्य यशो भुवि।
तावत् तस्याक्षयं स्थानं भवतीति विनिश्चिता॥ ३२॥
अनुवाद
जब तक इस पृथ्वी पर मनुष्य का यश फैलता रहेगा, तब तक परलोक में उसकी स्थिति अचल रहेगी, यह निश्चित है ॥32॥
So long as a man's fame continues to spread on this earth, his status in the next world will remain unshakable, this is certain. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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