श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.54.25 
वासुदेव उवाच
यशस: श्रेयसश्चैव मूलं मां विद्धि कौरव।
मत्त: सर्वेऽभिनिर्वृत्ता भावा: सदसदात्मका:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- हे कुरुपुत्र! तुम मुझे यश और सौभाग्य का स्रोत मानो। संसार में जितने भी सत्य और असत्य पदार्थ हैं, वे सब मुझसे ही उत्पन्न हुए हैं॥ 25॥
 
Lord Krishna said- O son of Kuru! You should consider me the source of fame and good fortune. All the true and false things in the world have originated from me.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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