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एवमुक्त: पाण्डवेन भगवान् केशवस्तदा।
अभिगम्य दुराधर्षं प्रव्याहारयदच्युत:॥ १४॥
अनुवाद
पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर की यह बात सुनकर, मर्यादा से कभी विचलित न होने वाले भगवान श्रीकृष्ण, दुर्जय भीष्मजी के पास गए और उनसे इस प्रकार बोले॥14॥
On hearing this from Pandunandan Yudhishthir, Lord Shri Krishna, who never deviates from his dignity, went near the formidable Bhishmaji and talked to him in this way. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥