श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 54: भगवान् श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.54.11 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्ते नारदेन भीष्ममीयुर्नराधिपा:।
प्रष्टुं चाशक्नुवन्तस्ते वीक्षांचक्रु: परस्परम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! नारदजी के ऐसा कहने पर सब राजा भीष्मजी के पास आये; परन्तु उनसे कुछ पूछने का साहस न हुआ। वे सब एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे ॥11॥
 
Vaishmpayana says - King! After Naradji said this, all the kings came near Bhishmaji; but they did not have the courage to ask him anything. They all started staring at each other. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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