श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.53.4 
पठन्ति पाणिस्वनिकास्तथा गायन्ति गायना:।
शङ्खानथ मृदङ्गांश्च प्रवाद्यन्ति सहस्रश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पुरुष हाथों से वीणा आदि बजाते हुए स्तुति करने लगे, गायक गीत गाने लगे और हजारों लोग शंख और मृदंग बजाने लगे॥4॥
 
Men playing veena etc. with their hands started reciting praises, singers started singing songs and thousands of people started blowing conch shells and mridangams. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)