श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 53: भगवान् श्रीकृष्णकी प्रातश्चर्या, सात्यकिद्वारा उनका संदेश पाकर भाइयोंसहित युधिष्ठिरका उन्हींके साथ कुरुक्षेत्रमें पधारना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.53.3 
तत: स्तुतिपुराणज्ञा रक्तकण्ठा: सुशिक्षिता:।
अस्तुवन् विश्वकर्माणं वासुदेवं प्रजापतिम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उसी समय स्तोत्र और पुराणों के ज्ञाता, मधुर वाणी वाले, सुशिक्षित सूत-मागध और उपासक जगत् के रचयिता और प्रजापालक भगवान वासुदेव की स्तुति करने लगे॥3॥
 
At the same time, the connoisseur of hymns and Puranas, the one with a sweet voice, the well-educated Suta-Magadha and the worshipers started praising Lord Vasudev, the creator of the world and the protector of the people. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)