Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.52.9: दुर्बलता के कारण मेरी जीभ तालू से चिपक गई है, ऐसी अवस्था में मैं कैसे बोल सकता हूँ? हे दशार्ह वंश की वृद्धि करने वाले प्रभु, मुझ पर पूर्ण प्रसन्न होइए॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दौर्बल्यात् सज्जते वाङ् मे स कथं वक्तुमुत्सहे।
साधु मे त्वं प्रसीदस्व दाशार्हकुलवर्धन॥ ९॥
अनुवाद
दुर्बलता के कारण मेरी जीभ तालू से चिपक गई है, ऐसी अवस्था में मैं कैसे बोल सकता हूँ? हे दशार्ह वंश की वृद्धि करने वाले प्रभु, मुझ पर पूर्ण प्रसन्न होइए॥9॥
‘Due to weakness my tongue sticks to the roof of my mouth, how can I speak in such a condition? O Lord who increases the Dasarha clan, please be completely pleased with me.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥