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mahabharat 12.52.26: ठीक इसी समय, मात्र दो घण्टों में, सहस्त्र किरणों वाले भगवान सूर्य पश्चिम दिशा में एक निर्जन प्रदेश में प्रकट हुए और वहाँ के वन को जला डाला।   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.52.26 
ततो मुहूर्ताद् भगवान् सहस्रांशुर्दिवाकर:।
दहन् वनमिवैकान्ते प्रतीच्यां प्रत्यदृश्यत॥ २६॥
 
 
अनुवाद
ठीक इसी समय, मात्र दो घण्टों में, सहस्त्र किरणों वाले भगवान सूर्य पश्चिम दिशा में एक निर्जन प्रदेश में प्रकट हुए और वहाँ के वन को जला डाला।
 
At this very time, in just two hours, the thousand-ray Sun, the Supreme Lord, appeared in a secluded region in the west, burning down the forest there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)