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mahabharat 12.52.17: अनघ! तुम्हारे अन्तःकरण में सम्पूर्ण ज्ञान प्रकट हो जाएगा। तुम्हारी बुद्धि किसी भी विषय में कुंठित नहीं होगी॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.52.17 
ज्ञानानि च समग्राणि प्रतिभास्यन्ति तेऽनघ।
न च ते क्वचिदासक्तिर्बुद्धे: प्रादुर्भविष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अनघ! तुम्हारे अन्तःकरण में सम्पूर्ण ज्ञान प्रकट हो जाएगा। तुम्हारी बुद्धि किसी भी विषय में कुंठित नहीं होगी॥ 17॥
 
Anagha! Complete knowledge will be revealed in your inner being. Your intellect will not be frustrated in any matter.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)