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mahabharat 12.52.12: अतः आप ही शीघ्र ही मुझसे वह बात कहिए जो धर्मराज के हित में हो; क्योंकि आप शास्त्रों के भी शास्त्र हैं। ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.52.12 
स्वयमेव भवांस्तस्माद् धर्मराजस्य यद्धितम्।
तद् ब्रवीत्वाशु सर्वेषामागमानां त्वमागम:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अतः आप ही शीघ्र ही मुझसे वह बात कहिए जो धर्मराज के हित में हो; क्योंकि आप शास्त्रों के भी शास्त्र हैं। ॥12॥
 
"Therefore you yourself should quickly tell me that which is in the interest of Dharmaraja; because you are the scripture of the scriptures." ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)