Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.50.8-9: उन्हें दूर से देखकर श्रीकृष्ण, धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर, अन्य चार पाण्डव, कृपाचार्य आदि सभी अपने रथों से उतर पड़े, अपने चंचल मन को वश में किया, अपनी समस्त इन्द्रियों को एकाग्र किया और वहाँ बैठे हुए महर्षियों की सेवा में उपस्थित हुए। | mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूरादेव तमालोक्य कृष्णो राजा च धर्मज:।
चत्वार: पाण्डवाश्चैव ते च शारद्वतादय:॥ ८॥
अवस्कन्द्याथ वाहेभ्य: संयम्य प्रचलं मन:।
एकीकृत्येन्द्रियग्राममुपतस्थुर्महामुनीन्॥ ९॥
अनुवाद
उन्हें दूर से देखकर श्रीकृष्ण, धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर, अन्य चार पाण्डव, कृपाचार्य आदि सभी अपने रथों से उतर पड़े, अपने चंचल मन को वश में किया, अपनी समस्त इन्द्रियों को एकाग्र किया और वहाँ बैठे हुए महर्षियों की सेवा में उपस्थित हुए।
Seeing them from a distance, Shri Krishna, Dharmaputra King Yudhishthira, the other four Pandavas, Kripacharya and others alighted from their chariots, controlled their restless minds, concentrated all their senses and presented themselves to serve the great sages sitting there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥