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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.50.6 
ततस्ते ददृशुर्भीष्मं शरप्रस्तरशायिनम्।
स्वरश्मिजालसंवीतं सायंसूर्यसमप्रभम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने देखा कि भीष्म बाणों की शय्या पर सो रहे हैं और संध्या के सूर्य की किरणों से घिरे हुए उनकी चमक फीकी पड़ रही है।
 
He saw that Bhishma was sleeping on a bed of arrows and was shining like the evening sun, surrounded by its rays.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)