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श्लोक 12.50.37  |
ये च केचन लोकेऽस्मिन्नर्था: संशयकारका:।
तेषां छेत्ता नास्ति लोके त्वदन्य: पुरुषर्षभ॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| हे महापुरुष! संसार में समस्त संशय का निवारण करने वाला आपके अतिरिक्त कोई नहीं है ॥37॥ |
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| 'O great man! There is no one other than you who can resolve all the doubts in the world. ॥ 37॥ |
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