श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.50.36 
इतिहासपुराणार्था: कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन विदितास्तव।
धर्मशास्त्रं च सकलं नित्यं मनसि ते स्थितम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इतिहास और पुराणों का अर्थ तुम्हें पूर्णतः ज्ञात है। सम्पूर्ण धर्मग्रन्थ सदैव तुम्हारे मन में विद्यमान रहते हैं॥ 36॥
 
‘The meaning of history and Puranas are fully known to you. The entire religious texts are always present in your mind.॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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