Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.50.34-35: आप वर्णसंकर वर्ण से उत्पन्न वर्णों के धर्म से अनभिज्ञ नहीं हैं। आप देश, जाति और कुल के धर्मों के लक्षणों को भली-भाँति जानते हैं। वेदों में प्रतिपादित धर्मों को तथा श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा कहे गए धर्मों को भी आप सदा से जानते हैं। ॥34-35॥ | mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप वर्णसंकर वर्ण से उत्पन्न वर्णों के धर्म से अनभिज्ञ नहीं हैं। आप देश, जाति और कुल के धर्मों के लक्षणों को भली-भाँति जानते हैं। वेदों में प्रतिपादित धर्मों को तथा श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा कहे गए धर्मों को भी आप सदा से जानते हैं। ॥34-35॥
You are not unaware of the religion of the hybrids born from the reverse order. You know very well the characteristics of the religions of the country, caste and clan. You have always known the religions propounded in the Vedas and also those told by the noble men. ॥ 34-35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥